श्रीनगर, 22 जून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में 24 जून को जम्मू-कश्मीर के नेताओं की सर्वदलीय बैठक बुलाई है। उमर अब्दुल्ला, फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती समेत 14 नेताओं को प्रधानमंत्री की इस बैठक में शामिल होने का न्योता मिला है। पीएम नरेंद्र मोदी की इस बैठक में शामिल होना है या नहीं, इस बात पर फैसला करने के लिए गुपकर गठबंधन के नेताओं ने आज मंगलवार (22 जून) को नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला के आवास पर बैठक बुलाई है। इस बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी की सर्वदलीय बैठक में जाना है या नहीं, इसपर आज आखिरी फैसला किया जाएगा। ये बैठक सुबह 11 बजे बुलाई गई है।
इलाके के विशेष दर्जे की बहाली के लिए पिछले साल जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में बने गुपकर गठबंधन (Gupkar Alliance) के घटक गुरुवार को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली सर्वदलीय बैठक की रणनीति तैयार करने के लिए मंगलवार को श्रीनगर (Srinagar) में बैठक करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला अपने आवास पर पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकर डिक्लेरेशन (PAGD) की बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
उनकी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और महबूबा मुफ्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) ने पहले अपनी पार्टियों की बैठकें की हैं और इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय अपने प्रमुखों के ऊपर छोड़ दिया है। NC और PDP दोनों ही PAGD का एक घटक है।
PAGD के प्रवक्ता मोहम्मद युसूफ तारिगामी ने कहा, "PAGD के सभी नेताओं को निमंत्रण दिया गया है और इस बैठक में सभी के शामिल होने की संभावना है, जिसमें गठबंधन के नेता रणनीति के बारे में निर्णय लेंगे।"
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस को ''कुछ बड़ा'' की उम्मीद
वहीं, पीपुल्स कांफ्रेंस ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों को बैठक के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से भेजे गए निमंत्रण का स्वागत किया और उम्मीद जतायी कि इस बैठक में ''कुछ बड़ा'' होगा. सज्जाद लोन के नेतृत्व वाली पीपुल्स कांफ्रेंस ने कहा कि दिल्ली और जम्मू-कश्मीर की जनता के बीच नया सामाजिक संपर्क स्थापित करने के लिये सभी हितधारकों को मिलकर काम करने की जरूरत है.
पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री के निमंत्रण के संदर्भ में लोन ने पार्टी नेताओं की बैठक की अध्यक्षता की. प्रवक्ता ने कहा, ''बैठक में शामिल नेताओं ने प्रधानमंत्री की पहल की सराहना करते हुए आशा व्यक्त की कि इस बैठक में कुछ बड़ा होगा और इससे लोकतंत्र की बहाली व जम्मू-कश्मीर की जनता के सशक्तिकरण के रास्ते खुलेंगे.''
ऐसी संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 जून को जम्मू-कश्मीर की सभी राजनीतिक पार्टियों संग बैठक करने वाले हैं। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि उनकी पार्टी केंद्र सरकार के इस निमंत्रण पर चर्चा करने के लिए रविवार को बैठक करेंगी। इस मीटिंग में इस बात पर विचार किया जाएगा कि पीएम मोदी की बैठक में भाग लिया जाए या ना लिया है। बता दें कि जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दल पहले ही घाटी में केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसलों से नाराज हैं।

जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में करीब दो साल बाद एक बार फिर राजनीतिक हलचल शुरू हुई है. आर्टिकल 370 को हटाने के बाद महीनों तक हिरासत में रहे कश्मीरी नेताओं को अब प्रधानमंत्री मोदी का बुलावा आया है. लेकिन इससे पहले फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और तमाम अन्य कश्मीरी नेताओं ने गुपकार गठबंधन बनाया, जिसके तहत पिछले कई हफ्तों से रणनीति तैयार की जा रही है, गुपकार आर्टिकल 370 की बहाली से लेकर कश्मीर से जुड़े तमाम मुद्दों को उठा रहा है. अब इस संगठन से जुड़े तमाम दलों के नेता प्रधानमंत्री से मुलाकात करने जा रहे हैं, ऐसे में इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है.
पीएम के सामने रखा जाएगा गुपकार का एजेंडा
पीएम मोदी के साथ मुलाकात से ठीक पहले गुपकार संगठन के नेताओं की एक बैठक हुई. जिसमें प्रधानमंत्री के न्योते को स्वीकार करने को लेकर चर्चा हुई और फैसला लिया गया कि गुपकार के नेता 24 जून को दिल्ली में होने वाली इस बैठक का हिस्सा होंगे.
इस मामले को लेकर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ‘’हम प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सामने अपना एजेंडा रखने की उम्मीद करते हैं.’’
इतना ही नहीं गुपकार गठबंधन ने ये भी साफ किया है कि वो दिल्ली में होने वाली इस बैठक में किसी भी तरह के दस्तावेज पर अपनी रजामंदी नहीं देने वाले हैं, खासतौर पर अगर सरकार आर्टिकल 370 पर उन्हें मनाने की कोशिश करती है तो ऐसा नहीं होने वाला.
बता दें कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यधारा के नेताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दिल्ली में 24 जून को एक बैठक के लिए बुलाया गया है. इसे जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने सहित राजनीतिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है.
यह बैठक, केंद्र की ओर से अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को निरस्त करने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के ऐलान के बाद से यह इस तरह की पहली कवायद होगी.
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